मैं धैर्य सीता सा रखूँगी, और तुम मेरे राम बन जाना,
भले मर्यादा को प्रथम चुनो, पर प्रेम मुझसे ही निभाना।
वनवास अगर संग लिखना हो, तो हाथ मेरा थामे रहना,
दुनिया लाख परीक्षा ले ले, पर तुम विश्वास कभी न खोना। 🔥
मैं विश्वास रुक्मिणी सा रखूँगी, और तुम मेरे कृष्ण बन जाना,
गोपीयों संग चाहे रास रचाओ, पर हृदय मेरा ही ठिकाना बनाना।
मैं प्रतीक्षा में भी अडिग रहूँगी, बस तुम सुदर्शन थामे आना,
नाम भले सबके संग जुड़े, पर मूल रूप में प्रेम मुझसे निभाना। 🎇
मैं तप पार्वती सा करूँगी, और तुम मेरे शिव बन जाना,
मौन में भी मुझे सुन लेना, और मेरे सम्मान में क्रोध जताना।
मैं अर्धांगिनी बन साथ चलूँगी, तुम मुझे पूर्ण मान अपनाना,
मैं धधकती अग्नि भी सह लूँगी, तुम बस कैलाश सा ठहर जाना। 🔱✨
▐ ■ αттιтυ∂є ιѕ α ℓιттℓє тнιηg тнαт мαкєѕ α вιg ∂郃єяєη¢є■▐
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