Tuesday, February 03, 2026

एहसास

कभी खामोशी में समझा, कभी अल्फ़ाज़ बने तुम,
मेरी हर उलझन में जैसे, सुकून का एहसास बने तुम।


कभी मेरी धड़कन, कभी मेरी दुआ बने तुम,

 हर मुश्किल हुई आसान  बस कारण बने तुम

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