Tuesday, March 03, 2026

बंद मुट्ठी

चल आज बंद मुट्ठी खोलते हैं,
जो चुभता रहा है, उसे बोलते हैं…
खामोशियों ने जो ज़ख़्म दिए,
आज उन पर खुलकर रोते हैं…

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